sita · aarti

सीता आरती

Sita Mata Ki Aarti |Aarti Shri Janak Dulari Ki (सीता आरती)- आरति श्रीजनक-दुलारी की। सीताजी रघुबर-प्यारी की।।

देवी सीता की मूर्ति
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (सीता)

सीता आरती को अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाकर श्रद्धा से पाठें।

दीप जलाकर श्रद्धा से देवता के समक्ष यह आरती गाएँ।

आरती के बोल

आरति श्रीजनक-दुलारी की।

सीताजी रघुबर-प्यारी की।।

जगत-जननि जग की विस्तारिणि,

नित्य सत्य साकेत विहारिणि।

परम दयामयि दीनोद्धारिणि,

मैया भक्तन-हितकारी ॥आरती..॥

सतीशिरोमणि पति-हित-कारिणि,

पति-सेवा-हित-वन-वन-चारिणि।

पति-हित पति-वियोग-स्वीकारिणि,

त्याग-धर्म-मूरति-धारी ॥आरती..॥

विमल-कीर्ति सब लोकन छाई,

नाम लेत पावन मति आई।

सुमिरत कटत कष्ट दुखदायी,

शरणागत-जन-भय-हारी की ॥

आरति श्रीजनक-दुलारी की।

सीताजी रघुबर-प्यारी की।।

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