ganesh · aarti
गणेश आरती — जय गणेश देवा
प्रतिदिन की पूजा और त्योहारों में गाई जाने वाली प्रिय गणेश आरती, विघ्नहर्ता की स्तुति।

गणेश आरती траitionally पूजा के आरंभ में की जाती है। दीप जलाएँ, पुष्प अर्पित करें, और श्रद्धा से गाएँ।
भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के समक्ष खड़े हों। जलते दीप के साथ आरती की थाली लें और गाते हुए वृत्ताकार घुमाएँ।
आरती के बोल
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी
पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा
लड्डुओं का भोग लगे, संत करें सेवा
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया
बंझन को पुत्र देत, निर्धन को माया
सुरश्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- गणेश आरती कब करनी चाहिए?
- गणेश आरती आदर्शतः किसी भी पूजा की शुरुआत में, गणेश चaturthi पर, और प्रतिदिन की सुबह या शाम की पूजा में की जाती है।
- आरती के लिए क्या सामग्री चाहिए?
- आपको घी या तेल का दीप, कपूर, फूल, अगरबत्ती और घंटी चाहिए। इन सामग्रियों के लिए आरती की थाली उपयोगी है।
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